दुर्गा वाहिनी रामगढ़ के द्वारा जिले भर में मनाया जा रहा है माता सीता जन्मोत्सव

माता सीता जन्मोत्सव कार्यक्रम 3 मई से शुरू हुआ है जो 9 मई तक चलेगा

माता सीता सामाजिक समरसता की प्रतिमूर्ति थी, निर्मल जल से श्रेष्ठ वाणी थी: अनामिका श्रीवास्तव

रामगढ़। विश्व हिंदू परिषद का युवतियों का संगठन दुर्गा वाहिनी के रामगढ़ जिला के द्वारा जिले भर के सभी प्रखंडों में मां सीता जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत मां सीता की जीवनी के बारे जिले के सभी प्रखंडों के बस्तियों तक पहुंच कर माता सीता जन्मोत्सव का कार्यक्रम किया जा रहा है।यह कार्यक्रम 3 मई से शुरू हुआ है जो 9 मई तक चलेगा, पूरे जिले भर में 100 स्थानों पर कार्यक्रम करने का लक्ष्य है।इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को जागरूक भी किया जा रहा है। रविवार को रामगढ़ जिले के बरकाकाना,छोटकाकाना,मतकमा चौक,लादी के सहित अन्य प्रखंडों के दर्जनों बस्तियों में माता सीता जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से दुर्गा वाहिनी की जिला संयोजिका अनामिका श्रीवास्तव उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ माता की चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। दुर्गा वाहिनी जिला संयोजिका अनामिका श्रीवास्तव ने मां सीता जन्मोत्सव में उपस्थित महिलाओं और युवतियों को संबोधित करते कहा कि माता सीता सामाजिक समरसता की प्रतिमूर्ति थी,ग्रामीण और वनवासी के प्रति आदर मान रखते हुये मां सीता ने स्नेह- संबंध प्रगाढ किये, राजा रानी होते हुए भी सब के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया,संबंधों की सुदृढता व सौजन्यता मां सीता ने वापिस आते हुए फिर मिलने का भाव सबसे रखा।मां सीता ने गंगाजी की पूजा की और मनोरथ पूर्ण करने के लिए कहा। निर्मल जल से श्रेष्ठ वाणी हुई माता सीता का केवट,निषाद और गुह के परिवार से बडी ही आत्मीयता से मिलना हुआ। उनका व्यवहार इतना आत्मीयपूर्ण था कि सभी भाव- विभोर हो गये। मां सीता का व्यवहार अभिभूत करने वाला अविस्मरणीय रहा। अनुसूया जी से आशीर्वाद लिया। राक्षसों के परिवार से भी आत्मीय सम्बन्ध रखे। उनके इसी सद्वयहार के कारण मंदोदरी, विभीषण व त्रिजटा रावण का साथ छोड़ गए।समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ आदर युक्त व्यवहार रहा। त्रिजटा को भी सम्मान से माता कही।चाहे सुमंत हो, ऋषि मुनि हो, माँ अनुसूईया हो या त्रिजता हो सबको सम्मान दिया। विधर्मी रावण से भी कठोर व्यवहार नही किया। समान व्यवहार के तहत चित्रकूट और पंचवटी मे आने वाले सभी से समान व्यवहार किया।आश्रम जीवन में जीवन का उत्तरार्ध वाल्मीकि आश्रम मे बिताया वंही अपने पुत्रों का पालन पोषण किया। आश्रम मे प्रत्येक प्राणी का ध्यान रखा साथ ही यथोचित सम्मान और स्नेह भी दी थी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से दुर्गा वाहिनी जिला सह संयोजिका प्रियंका कुमारी,गीता कुमारी काजल कुमारी,नैना,अंकिता सहित अन्य मौजूद थीं।

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