भारतीय सांस्कृतिक धरोहर : विश्व के लिए एक नई पहचान

डॉ रवि शरण दीक्षित

भारत की संस्कृति में प्राचीन समय से ही मूर्त और अमूर्त, स्मारक, ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक परंपराओं का स्थान रहा है l वर्तमान प्रवेश में कई ऐसी परंपराएं, तीज त्यौहार, उत्सव है जिनको संरक्षित करने की आवश्यकता है l यूनेस्को की सूची में विश्व की तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत हमारे पूर्वजों द्वारा हमें दी गई एक अमूल्य धरोहर है। वर्तमान में 145 देश के 730 से अधिक अमूर्त विरासतें इसमें सम्मिलित हैं, विश्व मे पहचान, मूल्यों, और जीवन के तरीके को दर्शाती है। सांस्कृतिक विरासत का महत्व न केवल हमारे वर्तमान को समझने में है, बल्कि यह हमारे भविष्य को भी आकार देती है। जिससे कि आगे आने वाली पीढ़ियां अपने संस्कारों, कला, त्यौहार, धार्मिक पर्व और धार्मिक यात्रा , सनातनी त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्रित कर सकें अमूर्त और मूर्त विरासत
अपने-अपने महत्व के लिए जानी जाती हैं
सांस्कृतिक विरासत।

साहित्यिक विरासत: यह हमारे पूर्वजों द्वारा लिखित साहित्य को दर्शाती है, जैसे कि वेद, पुराण उपनिषद गीता,महाभारत, रामायण, और अन्य प्राचीन ग्रंथ जो आज भी समाज के लिए कई स्थानों पर मानक के रूप में प्रभावशाली रूप में स्थापित है l
कलात्मक विरासत: यह हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को दर्शाती है, जैसे कि मूर्तियां, चित्र, और अन्य कला, जो स्थानीय स्तर पर भी पहचान रखते हुए विश्व के पटल पर भी अपनी पहचान बना रही हैं
संगीतमय विरासत: यह हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए संगीत को दर्शाती है, जैसे कि शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, और अन्य प्रकार के संगीत।
नृत्यमय विरासत: यह हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए नृत्य को दर्शाती है, जैसे कि भरतनाट्यम, कथक, और अन्य प्रकार के नृत्य।

सांस्कृतिक विरासत का महत्त्व

1. पहचान: सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान को दर्शाती है और हमें अपने मूल्यों और परंपराओं के बारे में बताती है। उदाहरण के तौर पर कावड़ यात्रा, महाकुंभ के अवसर को देखा जा सकता है प्रयाग महाकुंभ में, जिसमें 60 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी की, और उसे सनातन परंपरा को सहजता पूरे पूरे विश्व के सामने एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है साथ ही साथ इसका आर्थिक पक्ष भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है जिसने अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन दिया है जो संभवत विश्व के आर्थिक विद्वानों के लिए भी एक विषय के रूप में और उदाहरण के रूप में प्रस्तुत हो गया है
2.मूल्यों का संरक्षण: सांस्कृतिक विरासत हमारे मूल्यों को संरक्षित करने में मदद करती है और हमें अपने पूर्वजों के मूल्यों को समझने में मदद करती है।
3. सामाजिक समरसता : सांस्कृतिक विरासत हमें सामाजिक एकता की ओर ले जाती है और हमें अपने समुदाय के साथ जुड़ने में मदद करती है।
4. आर्थिक विकास: सांस्कृतिक विरासत हमें आर्थिक विकास की ओर ले जाती है और हमें अपने सांस्कृतिक संसाधनों का उपयोग करके आर्थिक लाभ प्राप्त करने में मदद करती है।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सांस्कृतिक शिक्षा को आवश्यक रूप से पाठ्यक्रम के साथ जोड़ा जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए l स्थानीय स्तर पर भी इस तरह के कार्यक्रम सरकार सुरक्षित किए जाने चाहिए उदाहरण के तौर पर उदयपुर में सरकार द्वारा बनाए गए कला केंद्र में स्थानीय कला को प्रदर्शित करने के लिए प्रतिदिन 3 से 4 शिफ्ट में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र तो है ही साथ ही साथ प्रभावशाली ढग से आर्थिक मे भूमिका अदा कर रहा है, और कला के संरक्षण को प्रोत्साहित कर रहा है।
भारतीय सांस्कृतिक विरासत मूर्ति तथा अमूर्त रूप में पूरे विश्व में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है आवश्यकता इस बात की है कि उसको समुचित तरीके से समाज के सामने और उसको सहेजने के लिए प्रभावशाली नीति रहे l भारत सरकार वर्तमान में मूर्त तथा अमूर्त त्योहार, उत्सवों के संरक्षण के लिए प्रभावशाली ढंग से कदम उठा रही है i

डॉ रवि शरण दीक्षित
, एसोसिएट प्रोफेसर,
इतिहास विभाग,
डी ए वी, पीजी कॉलेज देहरादून

Leave A Reply

Your email address will not be published.