चुनावी साल: चार माह में महज 24.57 फीसद बजट खर्च

पिछले साल इसी अवधि में केवल 22.19 फीसद बजट खर्च हो पाया था

  • चुनावी साल के लिहाज से अच्छी रफ्तार नहीं कही जा सकती खर्च की
  • चार माह के भीतर आदर्श आचार संहिता लग जाएगी तो ठहर जाएगा खर्च
देहरादून। यह साल चुनावी तैयारी का साल है लेकिन इसके बावजूद सरकार अब तक केवल 24.57 फीसद ही बजट खर्च कर पाई है। यह बात और है कि पिछले साल इसी अवधि में केवल 22.19 फीसद बजट खर्च हो पाया था। इस तरह इस बार बजट खर्च तुलनात्मक रूप से बढ़ा तो है लेकिन अगर गति यही रही तो मार्च बीतने तक 75 फीसद बजट खर्च होना भी नामुमकिन सा होगा क्योंकि चार महीने बाद आदर्श चुनाव संहिता लग जाएगी और अफसरशाही अपनी पुरानी घोंघा गति को प्राप्त हो जाएगी।

चुनावी साल के लिहाज से खर्च की यह रफ्ता अच्छी नहीं

चुनावी साल के लिहाज से खर्च की यह रफ्ता अच्छी नहीं कही जा सकती चार माह के भीतर आदर्श आचार संहिता लग जाएगी तो तय है कि खर्च की गति थम जाएगी।बहरहाल 53 हजार 9 करोड़ 16 लाख रुपये के बजट में से अप्रैल से जुलाई 2021 तक कुल 1326.9 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं । कुल प्राप्तियों की बात करें तो 53158.76 करोड़ में से 13030.88 यानी 24.51 फीसद प्राप्त हुए हैं जो कि पिछले साल से ज्यादा है यह पिछले साल इसी अवधि में 22.08 फीसद थी।
राजस्व व्यय की बात करें तो यह पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। इस बार 44036.31 करोड़ में से 11320.09 करोड़ यानी 25.51 फीसद खर्च हुए हैं जबकि पिछले साल इसी अवधि में 24.87 फीसद खर्च हुए थे।
राजस्व प्राप्ति की बात करें तो कुल लक्ष्य 44151.24 करोड़ का  जुलाई तक 25.29 फीसद यानी 11166.72 करोड़ ही हो पाई है जो कि पिछले साल इससे ज्यादा यानी 25.46 फीसद थी। कर राजस्व पिछले साल 19.424फीसद के मुकाबले बेहतर यानी 28.67 फीसद है जबकि गैर कर राजस्व में भारी गिरावट है वह इस अवधि में पिछले साल 21.78 फीसद था जबकि इस बार कुल लक्ष्य का केवल 13.59 फीसद ही रहा है।

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