उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे दलितों पर अत्याचार

2018 में जहां एससी के खिलाफ 58 अपराध हुए वहीं 2020 में बढक़र 87 

  • पुलिस 120 मामलों की जांच में जुटी है जिसमें से 87 केवल 2020 के हैं
देहरादून। उत्तराखंड मेंं अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर साल दर साल
लगातार अत्याचार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)के आंकड़ों
के मुताबिक 2018 से 2019 तक अनुसूचित जाति पर अत्याचार बढ़े हैं। वर्ष 2018
में जहां दलितों के खिलाफ 58 अपराध हुए वहीं 2019 में बढ़ कर वह 84 और
2020 में बढक़र 87 हो गए। बता दें कि प्रदेश में दलितों की आबादी करीब 18.7
प्रतिशत है।  उत्तराखंड में दलितों के विरुद्ध अपराध की दर 4.6 फीसद रही है।
हालांकि यह संतोष की बात रही कि 87.7 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए।

2020 में 33 मामले एससी-एसटी  के तहत दर्ज

कानून  के लिहाज से देखें तो वर्ष 2020 में प्रदेश में 33 मामले एससी-एसटी
अत्याचार निरोध कानून के तहत दर्ज हुए इनमें तीन मामले मारपीट के थे। जबकि
एक मामला हत्या का दर्ज हुई। दो मामले बच्चे से बलात्कार व एक मामला बच्चे से
बलात्कार के प्रयास का था। 54 मामले जानबूझकर अपमान करने के थे। प्रदेश में
दलितों पर अत्याचार के पुलिस 120 मामलों की जांच में जुटी है जिसमें से 87
केवल 2020 के हैं जबकि 33 मामले लंबित हैं। पुलिस ने नौै मामले सच्चे तो पाए हैं
लेकिन उसके पास उन्हें साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

पर्यावरण कानूनों के उल्लंघनके मामले में भारी उछाल

उत्तराखंड में पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन के मामले में भारी उछाल आया है। वर्ष 2018 में 194, 2019 में 96 व 2020 में 1271 मामले आए। 2020 में प्रदेश में पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन संबंधी 1271 मामले आए जिनमें से अधिकांश यानी 1248 सार्वजनिक व प्रतिबंधित स्थानों पर बीड़ी सिगरेट पीने थे थे। प्रदेश में वन कानून संबंधी 18 व वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन के पांच मामले सामने आए।

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