कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत और परिचय के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रगान तथा जनजातीय गौरव दिवस के महत्व पर परिचर्चा आयोजित की गई। विद्यार्थियों को भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और समाज के प्रति उनके योगदान की जानकारी दी गई।
इस दौरान प्रश्नोत्तरी, चित्रकला, नारा लेखन और खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रश्नोत्तरी में जनजातीय समाज, बिरसा मुंडा, जौनसारी संस्कृति और वीर केसरी चंद से जुड़े सवाल पूछे गए। इसमें ऋषिका तोमर ने प्रथम, अंकित ने द्वितीय और अन्शुल तोमर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन पर आकर्षक पोस्टर बनाए। इसमें अनीता प्रथम, ऋषिका द्वितीय और नेहा तृतीय रहीं। नारा लेखन प्रतियोगिता में प्राकृतिक आपदाओं से बचाव, हिमालय संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के संदेश हिंदी, अंग्रेजी तथा जौनसारी भाषा में प्रस्तुत किए गए। इसमें सारिका ने प्रथम, काजल ने द्वितीय और मोनिका ने तृतीय स्थान हासिल किया। कैरम प्रतियोगिता में नीरज और नितेश की जोड़ी प्रथम तथा आकाश और निखिल की जोड़ी द्वितीय रही।
वाडिया संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसी क्रम में जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़े के तहत यह आयोजन किया गया। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को हिमालयी पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया।
महाविद्यालय के चेयरमैन अनिल सिंह तोमर ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस अपनी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास को समझने का अवसर है। जौनसार-बावर की भाषा, बोली, पहनावा और परंपराएं इसकी विशिष्ट पहचान हैं। इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्य अतिथि डॉ. गोविंद सिंह रावत ने विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों, महाविद्यालय के शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

