चमोली। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों के तहत चमोली जिले में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) पूरी कर ली गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के अधिकृत इंजीनियरों ने जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मशीनों की जांच की। इस दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव कुमार ने शनिवार को ईवीएम-वीवीपैट वेयरहाउस का निरीक्षण कर जांच प्रक्रिया का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक चुनाव से पहले ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच कराना अनिवार्य है। चुनाव में केवल जांच में सफल और प्रमाणित मशीनों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए सभी मशीनों की जांच सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत की गई है।
जिले के कुल 633 मतदान केंद्रों के लिए 1,130 बैलेट यूनिट (बीयू), 1,250 कंट्रोल यूनिट (सीयू) और 1,294 वीवीपैट मशीनों की जांच सफलतापूर्वक पूरी हुई है।
एफएलसी के बाद मशीनों की कार्यक्षमता और तकनीकी विश्वसनीयता परखने के लिए 1 और 2 नवंबर 2026 को मॉकपोल कराया जाएगा। यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में रेंडमली चयनित मशीनों पर होगी। इसके लिए कुल मशीनों में से पांच प्रतिशत का चयन किया जाएगा। इनमें एक प्रतिशत मशीनों पर 1,200 वोट, दो प्रतिशत पर 1,000 वोट और शेष दो प्रतिशत मशीनों पर 500-500 वोट डालकर परीक्षण किया जाएगा।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मॉकपोल में अपने अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है।
