मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट ने साधारण परिवार से निकलकर छात्र राजनीति के माध्यम से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक और मंत्री जैसे विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। उनकी राजनीतिक यात्रा में आम आदमी की समस्याएं और जनहित से जुड़े मुद्दे हमेशा प्राथमिकता में रहे।
धामी ने कहा कि स्वर्गीय बिष्ट का श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के प्रति विशेष लगाव था। उन्होंने अपने अधिकारों और आजीविका के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की आवाज को मजबूती दी। समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता रही। यही कारण है कि अनेक परिवार उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में याद करेंगे, जो उनकी बात सुनने और अधिकारों के लिए खड़े होने को तत्पर रहते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं और कार्य करने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जनता के प्रति समर्पण सदैव सम्मान का विषय रहता है। हीरा सिंह बिष्ट की स्पष्टवादिता, अनुभव और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को हमेशा याद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन से लेकर प्रदेश के विकास तक हीरा सिंह बिष्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्री के रूप में श्रम, परिवहन और तकनीकी शिक्षा जैसे जनहित से जुड़े विभागों में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। उनका सार्वजनिक जीवन जनसेवा के प्रति समर्पण और आम जनता से जुड़ाव की मिसाल बना रहेगा।
