गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। तब से यहां समय-समय पर विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों में सत्रों की अवधि और संख्या में बदलाव देखने को मिला। वर्ष 2014 में यहां पहली बार तीन दिवसीय सत्र आयोजित हुआ था। वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा 2017 में दो दिवसीय सत्र चला। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक संचालित हुई, जबकि 2019 और 2022 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं किया गया।
वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र और 2021 में छह दिवसीय बजट सत्र आयोजित हुआ। इसके बाद 2023 में चार दिन तथा 2024 में तीन दिवसीय सत्र चला। वर्ष 2025 में गैरसैंण में बजट और मानसून सत्र आयोजित किए गए। अब 2026 में मार्च के बाद अक्टूबर में भी सत्र आयोजित होने से गैरसैंण की विधायी गतिविधियों को नया महत्व मिला है।
गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं और जनभावनाओं को सदन तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जाता है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से यह स्थान विशेष महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का प्रयास है कि भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि गैरसैंण की भूमिका मजबूत करने और राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
