राजीव महर्षि ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किसानों के 71,680 करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी कांग्रेस सरकारों ने किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से 2007 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और वर्ष 2012 से 2017 के बीच कांग्रेस सरकार ने गन्ना किसानों के हितों को प्राथमिकता दी।
महर्षि के अनुसार, वर्ष 2012-13 में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 250 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। वहीं, वर्ष 2013-14 में उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य 285 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जो उस समय उत्तर प्रदेश के 280 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य से पांच रुपये अधिक था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए। जनवरी 2014 में चीनी मिलों के लिए केंद्र से 350 करोड़ रुपये का राहत पैकेज प्राप्त करने की पहल की गई। इसके अलावा, जनवरी 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार ने गन्ना भुगतान के लिए चरणबद्ध व्यवस्था बनाई। इसके तहत खरीद के 14 दिनों के भीतर 240 रुपये प्रति क्विंटल का पहला भुगतान और शेष राशि के भुगतान की अलग व्यवस्था निर्धारित की गई।
महर्षि ने उमेश शर्मा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पर सवाल उठाकर वह सत्ताधारी दल को घेरने के बजाय उसका बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को अपने कार्यकाल में किसानों के लिए किए गए कार्यों का जवाब देना चाहिए।
