कांग्रेस प्रभारी की ओर से गैरसैंण में होने वाले सत्र के दौरान घेराव और प्रदर्शन की घोषणा को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने सदन के बाहर घेराव और भीतर हंगामे में समय बिताया। उनके मुताबिक, इस दौरान जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय विरोध-प्रदर्शन पर अधिक जोर दिया गया।
भट्ट ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाने और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है। ऐसे में विपक्ष को चाहिए कि वह सत्र की शुरुआत घेराव और विरोध से करने के बजाय सदन में सकारात्मक रुख के साथ भागीदारी करे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पांच साल बीतने के बाद भी कांग्रेस के रवैये में बदलाव नहीं दिखना निराशाजनक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्रों की शुरुआत घेराव और समापन हंगामे के साथ करने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं निकलता।
उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि आगामी सत्र में जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जाए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सरकार से सवाल पूछे जाएं। उनके अनुसार, विधानसभा में सार्थक चर्चा के माध्यम से जनता की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
गैरसैंण सत्र को लेकर कांग्रेस की प्रस्तावित रणनीति और भाजपा की प्रतिक्रिया के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब सत्र के दौरान विपक्ष के प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही पर सभी की नजरें रहेंगी।
