सितारगंज। उत्तरांचल विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला मंचन का शुभारंभ नारद मोह की लीला के साथ हुआ। पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने भगवान नारद की तपस्या, इंद्र के सिंहासन के डोलने और भगवान विष्णु के हरि रूप से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल और विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने फीता काटकर किया। इस दौरान अतिथियों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
नारद के अभिमान की दिखाई लीला
रामलीला के प्रथम प्रसंग में दिखाया गया कि भगवान नारद की कठोर तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। तपस्या भंग करने के लिए इंद्र पहले अप्सराओं और फिर कामदेव को भेजते हैं, लेकिन दोनों ही सफल नहीं हो पाते। इसके बाद नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो जाता है। वह स्वयं को काम और क्रोध पर विजय प्राप्त करने वाला मानने लगते हैं।
नारद के इस अभिमान को दूर करने के लिए भगवान विष्णु अपनी माया से उन्हें हरि रूप प्रदान करते हैं। नारद इसे वानर रूप समझकर क्रोधित हो जाते हैं और भगवान विष्णु को पत्नी के वियोग में वन-वन भटकने तथा वानरों की सहायता लेने का श्राप दे देते हैं। कलाकारों ने इस प्रसंग का प्रभावशाली मंचन किया।
श्रीराम के जीवन से मिलती है प्रेरणा
भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल ने स्थानीय कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और सनातन संस्कृति की आत्मा हैं। उनके जीवन से मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने सभी से श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
नगर पालिका अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने कहा कि रामलीला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धर्म, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कलाकारों के अभिनय और रामलीला के प्रसंगों का दर्शकों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
