नई दिल्ली। वर्ल्ड बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल में बैंक ने 6.6 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान लगाया था। यानी नए अनुमान में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहने के कारण यह बदलाव किया गया है।
वर्ल्ड बैंक की ताजा इंडिया डेवलपमेंट अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि 2024-25 में यह 7.2 प्रतिशत थी। मजबूत निवेश और निजी खपत ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण मांग को कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन, सरकारी आय सहायता, खाद्य सब्सिडी और कम महंगाई से मजबूती मिली। बाद में आयकर में राहत और जीएसटी में कटौती से शहरी खपत में भी तेजी आई। इसका फायदा ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं समेत मांग आधारित क्षेत्रों को मिला।
वैश्विक व्यापार तनाव के बावजूद भारत का निर्यात उम्मीद से बेहतर रहा। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स की वृद्धि पहली तिमाही में 7.2 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 6.1 प्रतिशत थी। बिजली क्षेत्र ने भी 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की बढ़ी मांग से इस क्षेत्र को मजबूती मिली।
वर्ल्ड बैंक ने आगे के लिए कुछ जोखिम भी बताए हैं। लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने से महंगाई, खपत और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं। मजबूत अल नीनो की स्थिति भारत में कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है।
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून भी अहम रहेगा। अगस्त तक बारिश में कमी की स्थिति बनी थी, हालांकि बाद में हुई बारिश से इसकी भरपाई काफी हद तक हुई। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती कृषि प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
