देहरादून। रचनात्मक कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से बुधवार को हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में ‘उत्तराखंड जनसंवाद 2026’ का आयोजन किया गया। दिनभर चले कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने इन सवालों को लेकर सामूहिक संघर्ष करने और विधानसभा चुनाव से पहले जनता का घोषणा पत्र तैयार करने पर सहमति जताई।
कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में पांच समूहों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने भू-कानून में लगातार किए गए बदलावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे उत्तराखंड की जमीन पर बाहरी प्रभाव बढ़ने की आशंका है। डॉ. प्रेम बहुखंडी ने पलायन पर चर्चा करते हुए कहा कि रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए बाहर जाना स्वाभाविक है, लेकिन पहाड़ों से जुड़ाव बनाए रखना और वापस लौटने के अवसर तैयार करना भी जरूरी है।
विजय भट्ट ने अनियोजित शहरीकरण के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी और अधिवक्ता रजिया बेग ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे उठाए, जबकि आरपी विशाल और जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर चर्चा की। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने साम्प्रदायिक और दलित उत्पीड़न के मामलों में मीडिया की भूमिका पर विचार रखे। राहुल कोटियाल ने सरकारी जमीनों की बिक्री का मुद्दा उठाया।
महिला अधिकारों पर दीपा कौशलम, पर्यटन और तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या पर अरण्य रंजन, किसानों की समस्याओं पर सरदार तेजिन्दर सिंह और पर्यावरण संरक्षण पर हिमांशु अरोड़ा ने अपनी बात रखी। ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ भेदभाव, पहाड़ों के कुटीर उद्योग, किसाऊ बांध, लोक कलाकारों की उपेक्षा, नौले-धारों के संरक्षण और पर्यावरणीय नुकसान जैसे विषय भी चर्चा में रहे।
रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने कहा कि यह मंच कांग्रेस का नहीं, बल्कि जन संगठनों का मंच है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आती है तब भी यह मंच सरकार को उसके कामकाज का आईना दिखाने का काम करेगा। कार्यक्रम में डॉ. रवि चोपड़ा, निर्मला बिष्ट, विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत कई लोगों ने सुझाव दिए। संचालन प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया।