नई दिल्ली। एशियन खेल 2026 में भारतीय दूरी धावकों के शानदार प्रदर्शन के बाद अमेरिकी कोच स्कॉट सिमंस की नजर अब लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक पर है। सिमंस के मार्गदर्शन में अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित ऊंचाई वाले प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास करने वाले भारतीय एथलीटों ने नागोया में कई महत्वपूर्ण पदक हासिल किए हैं।
गुलवीर सिंह ने एशियन खेलों में पांच दिनों के भीतर चार स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर तीन पदक जीते। उन्होंने 10,000 मीटर और 1,500 मीटर में रजत तथा 5,000 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया। सिमंस के अनुसार, गुलवीर की मुख्य तैयारी 10,000 मीटर के लिए की गई थी, लेकिन उसी प्रशिक्षण का फायदा उन्हें अन्य स्पर्धाओं में भी मिला।
सिमंस ने कहा कि गुलवीर की सफलता के पीछे निरंतर प्रशिक्षण और लंबी अवधि की तैयारी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने भारतीय दूरी दौड़ को पहले ‘सोया हुआ दिग्गज’ बताते हुए कहा था कि प्रतिभा मौजूद है, लेकिन खिलाड़ियों को अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय, सहयोग और लगातार प्रशिक्षण की जरूरत है।
इसी रणनीति का फायदा सावन बरवाल को भी मिला। उन्होंने पुरुष मैराथन में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया और एशियन खेलों की मैराथन स्पर्धा में भारत के 44 साल के पदक सूखे को खत्म किया। सिमंस ने कहा कि बरवाल को अनुभवी मैराथन धावकों के साथ प्रशिक्षण का लाभ मिला है।
महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में सीमा कुमारी ने कांस्य पदक जीतकर 2010 के बाद इस स्पर्धा में भारत को पहला एशियन खेल पदक दिलाया। सिमंस के मुताबिक, एक साथ प्रशिक्षण करने वाले खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से सभी को बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है।
भारतीय खिलाड़ियों की तैयारी में एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना और खेल मंत्रालय के सहयोग का भी उल्लेख किया गया है। खिलाड़ियों को लंबे समय तक अमेरिका में प्रशिक्षण का अवसर मिलने से तैयारी में निरंतरता आई है।
अब सिमंस की नजर 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है। उनका मानना है कि भारतीय धावकों में ओलंपिक क्वालीफिकेशन हासिल करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। हालांकि, क्वालीफिकेशन मानक चुनौतीपूर्ण हैं। सिमंस ने भारतीय दूरी दौड़ में और युवा खिलाड़ियों को जोड़कर लंबी अवधि की तैयारी पर जोर दिया है।