उत्तराखंड भाजपा की कोर कमेटी की बैठक तो हुई, पर नहीं आए नए प्रभारी राम माधव

सरकार और संगठन के फीडबैक में जुटे हैं दिल्ली में, 5 नामों पर चर्चा पर सहमति नहीं - निशंक, तीरथ समेत पैनल अटका

ममता सिंह
देहरादून। उत्तराखंड कोर कमेटी की बैठक तो हुई पर शामिल नहीं हुए नव नियुक्त प्रभारी राम माधव। हालांकि इस बैठक में नव नियुक्त संगठन महामंत्री जरूर आए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आए, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, महेंद्र भट्ट सहित उत्तराखंड भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में 2 घंटे चली। एजेंडा था – राज्यसभा की एक सीट, 3 निगमों के अध्यक्ष, और संगठन में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति। लेकिन बैठक का सबसे बड़ा सवाल था – प्रभारी राम माधव क्यों नहीं आए?

राम माधव क्यों नहीं आए? दिल्ली में फीडबैक का दौर

सूत्र बता रहे हैं वे दिल्ली में हैं और वे सरकार और संगठन दोनों का फीडबैक ले रहे हैं।

राम माधव का अंदाज पूर्वोत्तर वाला है। वह पहले किसी बैठक में नहीं आते, पहले जमीन की रिपोर्ट लेते हैं। पिछले 3 दिन से दिल्ली में हैं – IB की रिपोर्ट, संघ के प्रचारकों की रिपोर्ट, और उत्तराखंड से आए 20 कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन बात।

उनके करीबी ने कहा – “राम माधव जी बैठक में आकर भाषण नहीं देना चाहते। वह चाहते हैं कि पहले उन्हें पता चले कि दुष्यंत गौतम और अजेय कुमार ने कहां-कहां गड़बड़ की, महेंद्र भट्ट क्यों सुस्त हैं, धामी अकेले क्यों लड़ रहे हैं। इसलिए वह सरकार और संगठन दोनों का फीडबैक ले रहे हैं।”

दूसरा कारण – हाईकमान ने उन्हें कहा है कि राज्यसभा का फैसला दिल्ली से होगा, देहरादून से नहीं। इसलिए वह देहरादून की कोर कमेटी में आकर किसी गुट का दबाव नहीं लेना चाहते।

बैठक में क्या हुआ? 5 नामों पर चर्चा, पर सहमति नहीं

माना जा रहा है कि डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत सहित कुल 5 नामों पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन किसी भी एक नाम पर सहमति नहीं बनी।

सूत्रों के मुताबिक ये नाम थे –
रमेश पोखरियाल निशंक – पूर्व सीएम, पूर्व केंद्रीय मंत्री। निशंक गुट ने कहा – ब्राह्मण चेहरा, हिंदी के बड़े नेता, राज्यसभा भेजो।
तीरथ सिंह रावत –पूर्व सीएम, पौड़ी से सांसद रहे। ठाकुर चेहरा, संघ के करीबी।
सतपाल महाराज -कैबिनेट मंत्री, बड़ा चेहरा, लेकिन उम्र का पेच।

संघ प्रचारक – एक नया नाम, संघ ने दिया, जो संगठन को मजबूत करे।

धामी चाहते हैं निशंक या तीरथ में से कोई एक, ताकि पुराने सीएम नाराज न हों। धन सिंह रावत चाहते हैं कि ठाकुर चेहरे को भेजो ताकि पहाड़ में संतुलन बने। महेंद्र भट्ट चाहते हैं कि अनिल बलूनी को ही रिपीट करो, त्रिवेंद्र सिंह रावत चुप रहे, क्योंकि वह खुद मुख्यमंत्री की रेस में हैं।

नतीजा – किसी भी एक नाम पर सहमति नहीं बनी। कोर कमेटी ने फैसला टाल दिया और गेंद राम माधव और हाईकमान के पाले में डाल दी।

नव नियुक्त संगठन महामंत्री आए, क्या संकेत?

बैठक में नव नियुक्त संगठन महामंत्री जरूर आए। उनका नाम अभी घोषित नहीं, लेकिन संघ के प्रचारक हैं। वह पूरे समय नोट करते रहे – कौन क्या बोल रहा है। मतलब अब हर गुट की बात दिल्ली जाएगी।

भाजपा में अराजकता का दौर खत्म करने के लिए राम माधव का न आना भी एक रणनीति है। वह पहले फीडबैक लेंगे, फिर एक-एक गुट को बुलाएंगे, फिर फैसला होगा।

कोर कमेटी की बैठक तो हो गई, लेकिन असली बैठक तो अब दिल्ली में होगी जब राम माधव रिपोर्ट देंगे। तब तय होगा कि उत्तराखंड से राज्यसभा कौन जाएगा और संगठन किसके हाथ में रहेगा।

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