देहरादून। उत्तराखंड को रोपवे हब के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी से करीब 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा विकसित करना है।
मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी 9 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार, रोपवे पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क परिवहन का प्रभावी विकल्प बन सकते हैं। इससे धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने के साथ स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने फिलहाल छह परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, जोशीमठ-औली-गोरसों और रैथल-दयारा बुग्याल रोपवे शामिल हैं।
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण पहले से प्रगति पर है। इसके पूरा होने पर देहरादून से मसूरी की यात्रा का समय करीब 15 से 20 मिनट रहने की उम्मीद है। वहीं जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे से श्रद्धालुओं को करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिल सकती है। चंपावत में ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे भी प्रस्तावित है।
अल्मोड़ा में रानीखेत-चौबटिया, कसारदेवी-अल्मोड़ा, दूनागिरी मंदिर और अन्य मार्गों की फिजिबिलिटी स्टडी प्रस्तावित है। देहरादून में कैमल बैक रोड-लाल टिब्बा, जॉर्ज एवरेस्ट, कैंपटी फॉल, टपकेश्वर-गुच्चूपानी, गुच्चूपानी-पैसिफिक मॉल, रायपुर-मालदेवता और मालदेवता-धनोल्टी सहित कई रूटों का अध्ययन किया जा रहा है।
परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी एनएचएलएमएल, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम और पर्यटन विभाग को दी गई है। सरकार का मानना है कि रोपवे नेटवर्क से दुर्गम क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ बढ़ते यातायात और प्रदूषण के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।