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रूसी तेल पर अमेरिका का नया दांव, भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरा

भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं

नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 16 सितंबर। रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश ने भारत और चीन के लिए नई चिंता पैदा कर दी है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसमें रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम अमेरिकी नीति नहीं बना है।

यह विधेयक दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर Lindsey O. Graham Sanctioning Russia Act of 2026 के रूप में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी सीनेट ने सात अगस्त को इसे 86-11 मतों से मंजूरी दी थी। सीनेट के संस्करण में राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के पांच बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है

भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। ऐसे में यदि अंतिम कानून में मौजूदा प्रावधान बरकरार रहता है और भारत उसके दायरे में आता है, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है। हालांकि, टैरिफ स्वतः लागू नहीं होगा; इसका वास्तविक दायरा अंतिम कानून और अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।

विधेयक का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना है। इसमें रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के साथ तेल की ढुलाई करने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी प्रतिबंध मजबूत करने का प्रस्ताव है।

हालांकि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक को लेकर कई संशोधन प्रस्तावित हैं। कुछ सांसद टैरिफ संबंधी अधिकारों को सीमित या हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए अंतिम कानून में भारत और अन्य देशों पर प्रस्तावित शुल्क किस रूप में लागू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हाउस से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही इसकी अंतिम स्थिति तय होगी।

 

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