हैदराबाद। प्रकृति अपने भीतर कई ऐसे रहस्य और खूबसूरत नजारे समेटे हुए है, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ और आकर्षक फूल इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। फूल की बनावट इतनी अनोखी है कि इसके मध्य भाग में शिवलिंग जैसी छोटी आकृति दिखाई देती है, जबकि इसकी ऊपर की पंखुड़ियां फन फैलाए नाग जैसी नजर आती हैं। इसी वजह से इसे धार्मिक आस्था से भी जोड़कर देखा जाता है।
तेलुगु में इसे नागमल्ले पुव्वु कहा जाता है, जबकि हिंदी में यह नागपुष्प या शिवलिंगी फूल के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिक रूप से यह कैननबॉल ट्री का फूल है। इस पेड़ की खासियत केवल इसके फूल तक सीमित नहीं है। इसके फूल और बाद में बनने वाले गोलाकार फल डालियों पर नहीं, बल्कि सीधे पेड़ के मुख्य तने से निकलने वाले गुच्छों में लगते हैं। इसके फल आकार और बनावट में तोप के गोलों जैसे दिखाई देते हैं, जिसके चलते इसे कैननबॉल ट्री कहा जाता है।
जब इस पेड़ पर एक साथ बड़ी संख्या में फूल खिलते हैं तो इसका दृश्य बेहद मनमोहक नजर आता है। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला-तिरुपति क्षेत्र के अलावा तेलंगाना और हैदराबाद में भी इसके पेड़ देखे जा सकते हैं। नामपल्ली के पब्लिक गार्डन्स, संजीवैया पार्क और कोंडापुर स्थित बॉटनिकल गार्डन में इसके बड़े पेड़ मौजूद हैं। इसके अलावा उस्मानिया विश्वविद्यालय के हरे-भरे परिसर और कुछ पुराने सरकारी उद्यानों में भी यह पेड़ देखने को मिलता है।
हैदराबाद, सिकंदराबाद और तेलंगाना के कई ऐतिहासिक शिव मंदिरों के परिसरों में भी श्रद्धालुओं ने इसे आस्था के प्रतीक के तौर पर लगाया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है और मंदिरों में पूजा के दौरान इसे चढ़ाना शुभ समझा जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर भी इसका उपयोग किया जाता है। फूल की हल्की और मीठी सुगंध इसे और आकर्षक बनाती है।
धार्मिक महत्व के साथ आयुर्वेदिक परंपरा में भी इस पेड़ के पत्तों और छाल के उपयोग का उल्लेख मिलता है। त्वचा संबंधी समस्याओं और दर्द से राहत के लिए इनके पारंपरिक इस्तेमाल की बात कही जाती है।