बागेश्वर। कांडा तहसील के बाखेत गांव में लगातार हो रहे भूस्खलन और पहाड़ी से गिरते पत्थरों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी मकानों के ऊपरी हिस्से में लंबे समय से चल रहे सोपस्टोन खनन के कारण पहाड़ी कमजोर हो गई है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी जनहानि और पशुहानि हो सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार भारी बारिश के दौरान घरों की छतों और दीवारों से पानी रिसने लगता है। कई मकानों में दरारें बढ़ रही हैं और जमीन भी अस्थिर होती जा रही है। पत्थर गिरने की घटनाओं से लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की दिशा में अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है।
गांव की सीमा देवी ने बताया कि उनका घर तीन बार ढह चुका है। छोटे बच्चों के साथ उन्हें हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। उनका आरोप है कि खनन के कारण पहाड़ी अंदर से खोखली और कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि खनन से रोजगार मिलने की बात कही जाती है, लेकिन उनके जैसे प्रभावित परिवारों को इसका कोई लाभ नहीं मिला।
ग्रामीण बबीता ने बताया कि खनन क्षेत्र से आने वाला पानी अक्सर उनके घर में घुस जाता है। बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके सामने दोबारा घर बनाने के लिए जगह की समस्या भी बनी हुई है।
भावना देवी ने बताया कि उनके पति का करीब एक वर्ष पहले निधन हो गया था। बारिश के दौरान रात में पानी बार-बार घर में भर जाता है, जिससे परिवार को गीले बिस्तर पर सोने को मजबूर होना पड़ता है। उन्हें डर है कि कहीं उनका एकमात्र घर भी न छिन जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता विनय कर्म्याल ने आरोप लगाया कि गरीब और अनुसूचित जाति के परिवार अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने रखने के लिए पर्याप्त संसाधनों से वंचित हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए गंभीरता से कदम उठाने की मांग की।