ज्योलिकोट में बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर

देहरादून। नैनीताल जिले के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में जलजनित रोगों की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी, जांच और उपचार का अभियान तेज कर दिया है। शासन स्तर पर भी स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वेक्षण, जांच और उपचार के साथ जरूरतमंद मरीजों को तत्काल रेफरल सुविधा उपलब्ध कराई जाए। 18 अगस्त 2026 से अब तक 1540 घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। पीएचसी ज्योलिकोट की ओपीडी में 675 और स्वास्थ्य शिविरों में 468 मरीजों को उपचार एवं परामर्श दिया गया है। इसके अलावा 130 मरीजों को आईपीडी के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराया गया।

रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 673 लोगों को ओआरएस तथा 3900 क्लोरीन टैबलेट वितरित की गई हैं। आउटब्रेक प्रबंधन के लिए सरकारी और निजी चिकित्सकों समेत 53 स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें 26 चिकित्सक, 13 पैरामेडिकल स्टाफ, पांच सपोर्ट स्टाफ, सात आशा कार्यकर्ता और दो एएनएम शामिल हैं। ज्योलिकोट अस्पताल को 24 घंटे संचालित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन 100 से अधिक सैंपल लेकर जांच कर रहा है। रक्त नमूनों में हेपेटाइटिस-ए (HAV), हेपेटाइटिस-ई (HEV), कल्चर और एलएफटी की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार स्टूल कल्चर भी कराया जा रहा है। पेयजल की गुणवत्ता जांच के तहत अवशिष्ट क्लोरीन और फीकल कंटेमिनेशन की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच भी नियमित रूप से की जा रही है।

सुबोध उनियाल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों का नियमित क्लोरीनीकरण कराया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रभावित गांवों में चिकित्सकों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं की नियमित फील्ड विजिट सुनिश्चित की गई है। साथ ही ओआरएस और जिंक कॉर्नर की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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