नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से संवाद करते हुए कहा कि देश के भविष्य को आकार देने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज के बच्चों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। ऐसे में शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बच्चों में ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और अच्छे मूल्यों का विकास भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और सोच को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों के प्रयासों से बच्चों में देश के प्रति जिम्मेदारी, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित की जा सकती है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके नवाचार और समर्पण देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपने अनुभवों और नवाचारों को अन्य शिक्षकों के साथ साझा करने की अपील भी की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को ज्ञान, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में और मजबूत बनाना है। इसके लिए विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों में सीखने की जिज्ञासा विकसित करने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी और डॉ. सुकांत मजूमदार भी मौजूद रहे। संवाद के दौरान शिक्षकों के योगदान और उनके अनुभवों को भी महत्व दिया गया।