जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण रूप में सजे बाबा महाकाल, दिव्य श्रृंगार ने मोहा मन

उज्जैन। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और भव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस दौरान भगवान महाकाल को श्रीकृष्ण स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर वैष्णव तिलक लगाया गया, जबकि शेषनाग के रजत मुकुट समेत चांदी के आभूषणों से उनका मनोहारी श्रृंगार किया गया। विशेष स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर तड़के मंदिर के कपाट खोले गए। इससे पहले सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। घंटी बजाकर भगवान महाकाल से आज्ञा लेने के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह में पहुंचकर पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारा और विधि-विधान से पूजन-अर्चन शुरू किया।

सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। कर्पूर आरती और अन्य धार्मिक विधियां पूरी होने के बाद विशेष श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई।

जन्माष्टमी पर बाबा महाकाल को भांग, चंदन, भस्म, ड्रायफ्रूट और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। भगवान को रजत चंद्र, त्रिशूल, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।

भस्म आरती की परंपरा के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच ज्योतिर्लिंग पर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी बाबा महाकाल को भस्म चढ़ाई गई। इस दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।

भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दर्शन के बाद भक्तों ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार नंदी के माध्यम से भक्त अपनी प्रार्थना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। जन्माष्टमी पर बाबा महाकाल के श्रीकृष्ण स्वरूप और विशेष श्रृंगार ने महाकाल की नगरी के आध्यात्मिक वातावरण को और भक्तिमय बना दिया।

 

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