3100 मीटर ऊंचे जौराई बुग्याल पर पर्यटन की नई उम्मीद, युवाओं को होमस्टे के लिए प्रेरित करेंगे डीएम

उत्तरकाशी, उत्तरकाशी जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। प्रसिद्ध दयारा बुग्याल के साथ जिले के अन्य बुग्याल और ताल भी पर्यटकों एवं ट्रेकिंग प्रेमियों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। इन्हीं में करीब 3100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जौराई बुग्याल को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

जौराई बुग्याल के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए स्थानीय स्तर पर समिति गठित कर मेले का आयोजन शुरू किया गया है। इसी मेले में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य आजादी के बाद पहली बार स्याबा गांव पहुंचे। उनके पहुंचने पर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया और जमकर नारे लगाए।

मेले में स्थानीय लोगों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में पांडव नृत्य प्रस्तुत किया। पांडव नृत्य में ग्रामीणों के साथ अन्य लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान दयारा बुग्याल की परंपरा की तर्ज पर ग्रामीणों ने दूध, दही, मट्ठा और मक्खन से देवी-देवताओं तथा द्रोपदी माता का अभिषेक किया और क्षेत्र, पशुधन एवं ग्रामीणों की सुख-समृद्धि की कामना की।

स्थानीय मान्यता के अनुसार जौराई बुग्याल का संबंध पांडवों की हिमालय यात्रा से भी जोड़ा जाता है। बुजुर्गों का कहना है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव इसी क्षेत्र से होकर हिमालय के केदारनाथ और बदरीनाथ क्षेत्र की ओर गए थे। इससे यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि जौराई बुग्याल को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए सबसे पहले गांव में होमस्टे व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने होमस्टे शुरू करने के इच्छुक युवाओं की सूची और संपर्क नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि पर्यटन का लाभ केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी मजबूती मिलनी चाहिए।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क सुविधा पहुंचने से क्षेत्र के विकास की नई उम्मीद जगी है। यहां प्रसिद्ध ककड़ी के साथ स्थानीय अनाज, दूध-दही उत्पाद और पहाड़ी व्यंजन भी पर्यटकों के लिए आकर्षण बन सकते हैं। बुग्यालों में दुर्लभ वनस्पतियां, जड़ी-बूटियां और रंग-बिरंगे फूल भी पर्यटन को बढ़ावा देने की क्षमता रखते हैं।

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