भारत-चीन सीमा विवाद पर बड़ा कदम, डोभाल-वांग यी ने तय की आगे की राह

नई दिल्ली,  भारत और चीन ने अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई है। यह सहमति बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता में बनी। दोनों पक्षों ने माना कि द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

बैठक के दौरान डोभाल और वांग यी ने सीमा विवाद के साथ-साथ भारत-चीन के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई महत्वपूर्ण सहमतियों के क्रियान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की।

वार्ता में दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने और सीमा पार आदान-प्रदान को फिर से शुरू करने पर भी संतोष व्यक्त किया गया। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और तीन निर्धारित सीमा व्यापारिक दर्रों के माध्यम से व्यापार को लेकर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इन गतिविधियों को द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना।

बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के रणनीतिक मार्गदर्शन में दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने रचनात्मक और दूरदर्शी रवैये के साथ सीमा प्रश्न पर गहन विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने अपने व्यापक और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए प्रयास जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

डोभाल दो दिवसीय बीजिंग यात्रा पर थे। उन्होंने वांग यी के निमंत्रण पर वार्ता में हिस्सा लेने के साथ चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत और चीन को महत्वपूर्ण पड़ोसी तथा प्रमुख विकासशील देश बताया।

वांग यी ने कहा कि चीन-भारत संबंधों का स्वस्थ और स्थिर विकास दोनों देशों के लोगों के मूलभूत हित में है। उन्होंने इसे वैश्विक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। चीन ने आपसी समझ बढ़ाने, मतभेद दूर करने और द्विपक्षीय संबंधों में मौजूद बाधाओं को कम करने की इच्छा जताई।

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