मतदाता सूची की जांच तेज, आयोग ने प्रारूप-7 की आपत्तियों पर दिए सख्त निर्देश

देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 के तहत मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में भारत निर्वाचन आयोग की टीम ने मंगलवार को देहरादून जनपद का दौरा कर पुनरीक्षण कार्यों की रैंडम जांच, ऑडिट और पर्यवेक्षण किया। टीम ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान, उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह तथा सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रगति की समीक्षा की।

आयोग की टीम ने जिले में गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए प्रारूप-7 के तहत प्राप्त आपत्तियों का निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक निस्तारण करने के निर्देश दिए। मृत्यु या स्थानांतरण के कारण मतदाता का नाम हटाने से पहले संबंधित जानकारी का बीएलओ और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से क्रॉस-वेरिफिकेशन कराने पर विशेष जोर दिया गया।

टीम ने उन मतदाताओं से दोबारा संपर्क करने को कहा, जिन्होंने निर्धारित 11 प्रमाण-पत्रों में से अब तक कोई प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक आवश्यक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जनपद में अब तक 11,90,805 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित विवरण में विसंगति मिलने अथवा आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले मामलों में 21 अगस्त तक बीएलओ के माध्यम से 5,47,617 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि जिले में 96,187 ऐसे मतदाता भी चिन्हित किए गए हैं, जिनके नाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। ऐसे मतदाताओं को अपनी इच्छा के अनुसार किसी एक राज्य की मतदाता सूची में रहने का विकल्प दिया जा रहा है। बीएलओ घर-घर जाकर उन्हें जानकारी देंगे और उनकी स्वेच्छा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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