टिहरी। नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज निर्माण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता के बाद भी समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को आंदोलनकारियों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री की ओर से नई टिहरी क्षेत्र में ही मेडिकल कॉलेज खोलने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद लिखित आश्वासन नहीं मिलने से आंदोलनकारी संतुष्ट नहीं हैं। इसके चलते अब आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं।
नई टिहरी जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से उठती रही है। स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मेडिकल कॉलेज की स्थापना बेहद जरूरी है। इस मांग को लेकर टिहरी के करीब 44 संगठन पिछले एक माह से अधिक समय से आंदोलनरत हैं।
आंदोलन की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की ओर से भासो पिफल्टी में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए भूमि चयन का प्रस्ताव मांगे जाने के बाद हुई। आंदोलनकारियों का दावा है कि नई टिहरी में भूमि का चयन कर करीब तीन माह पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। बाद में मेडिकल कॉलेज के लिए किसी अन्य स्थान से भी भूमि चयन का प्रस्ताव मांगे जाने से विवाद और बढ़ गया।
मेडिकल कॉलेज निर्माण की मांग को लेकर मेडिकल संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 16 अगस्त से गणेश चौक पर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। इससे पहले 31 जुलाई और 16 अगस्त को भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए गए थे। आंदोलन में लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए देहरादून बुलाया था।
भाजपा जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत और स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री आवास पहुंचा। वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने नई टिहरी क्षेत्र में ही मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का आश्वासन दिया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी तथा लिखित आश्वासन नहीं मिलने से प्रतिनिधिमंडल निराश होकर लौट गया।
प्रतिनिधिमंडल के नई टिहरी लौटने के बाद मेडिकल संयुक्त संघर्ष समिति की कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में वार्ता के पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
बैठक में तय किया गया कि 31 अगस्त तक सरकार यदि मेडिकल कॉलेज के संबंध में कोई सार्थक और स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है तो 1 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने को क्रमिक अनशन में तब्दील कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग क्षेत्र की जनता के हित से जुड़ी है और जब तक इस पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।