देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर उत्तराखंड में निर्वाचन विभाग ने निगरानी और सख्त कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने शनिवार को कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के आयुक्तों तथा देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। बैठक में मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दावे और आपत्तियों की सुनवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार की जाए। उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने जिलाधिकारियों से राजनीतिक दलों और मीडिया के साथ नियमित संवाद बनाए रखने को भी कहा, ताकि पुनरीक्षण अभियान में पारदर्शिता बनी रहे।
समीक्षा के दौरान सभी जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खास तौर पर उन बूथों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए, जहां मतदाता संख्या में 4 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी या 2 प्रतिशत से अधिक कमी की संभावना है। ऐसे बूथों का संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण और समीक्षा करेंगे तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
डॉ. पुरुषोत्तम ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के हालिया जनपद भ्रमण से संबंधित फीडबैक भी लिया। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को लगातार फील्ड विजिट करने और पुनरीक्षण कार्य की जमीनी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास समेत दोनों मंडलायुक्त और संबंधित जिलाधिकारी मौजूद रहे। निर्वाचन विभाग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।