भावनगर, गुजरात के भावनगर जिले में नकली और जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। घटना में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 20 लोग अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नकली शराब को लोकप्रिय आईएमएफएल ब्रांड की डुप्लीकेट बोतलों में भरकर बाजार में खपाया जा रहा था। पुलिस को आशंका है कि नकली शराब की कुछ खेप मध्य प्रदेश से भावनगर पहुंची थी। इसके बाद इसे अलग-अलग इलाकों में अवैध तरीके से बेचे जाने की बात सामने आई है।
घटना के बाद पुलिस ने अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने कई संदिग्ध शराब तस्करों को हिरासत में लिया है और बड़ी संख्या में नकली शराब की बोतलें बरामद की हैं। मामले में 21 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद गुजरात में शराबबंदी के बीच अवैध शराब की बिक्री का मामला गंभीर चिंता का विषय बन गया है। भावनगर शहर और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध शराब के कारोबार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ताजा घटना ने पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शराब तस्करों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है और अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि नकली शराब की खेप कहां तैयार हुई, इसे भावनगर तक कौन लेकर आया और इसके वितरण में कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस की जांच का मुख्य फोकस नकली शराब की सप्लाई चेन और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचना है।