15 अगस्त को हर स्कूल-कॉलेज में उठेगी बेटियों के सम्मान की आवाज, दिलाई जाएगी खास प्रतिज्ञा

देहरादून। बाल लिंगानुपात में सुधार और बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से देहरादून जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। 15 अगस्त 2026 को जिले के विद्यालयों, डिग्री कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ दिलाई जाएगी।

इस संबंध में जिला समुचित प्राधिकारी, पीसीपीएनडीटी एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों को अपने स्तर पर प्रतिज्ञा कार्यक्रम आयोजित करना होगा। प्रशासन का उद्देश्य इस अभियान के जरिए समाज में बेटियों के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव लाना और लिंग भेद जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है।

प्रतिज्ञा के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों को कन्या भ्रूण हत्या और लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प दिलाया जाएगा। इसके साथ ही बेटियों को बेटों के समान प्यार, पोषण, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की भावना को मजबूत किया जाएगा।

अभियान में बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को लेकर भी जागरूकता पैदा करने पर जोर रहेगा। विद्यार्थियों और शिक्षकों से यह संकल्प लेने की अपील की जाएगी कि वे अपने घर और समाज में बेटियों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध करेंगे और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए प्रयास करेंगे।

प्रतिज्ञा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसा सामाजिक वातावरण तैयार करने से जुड़ा होगा, जहां हर बेटी खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। प्रशासन का जोर बेटियों को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करने पर है।

जिला प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के माध्यम से बेटियों के संरक्षण और सम्मान का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

प्रशासन को उम्मीद है कि स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित यह अभियान बाल लिंगानुपात में सुधार के प्रयासों को मजबूती देने के साथ समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक और समानता आधारित सोच विकसित करने में मददगार साबित होगा।

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