गोरखा भर्ती को लेकर पोखरा में प्रदर्शन, नेपाली युवाओं ने भारत सरकार से फिर खोले दरवाजे की मांग की

काठमांडू, भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में नेपाली युवाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर बुधवार को पोखरा में प्रदर्शन किया गया। भारतीय भूतपूर्व सैनिक गोर्खा ब्रिगेड नेपाल, पोखरा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पूर्व भारतीय सैनिकों के साथ सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं ने भी हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारी पोखरा के विभिन्न इलाकों से होते हुए जिला प्रशासन कार्यालय कास्की पहुंचे। यहां उन्होंने प्रमुख जिला अधिकारी कुमारसिंह गुरुङ के माध्यम से नेपाल सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन पर ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्णबहादुर खत्री के हस्ताक्षर हैं। इसे प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गृहमंत्री सुधन गुरुङ को संबोधित किया गया है।

पूर्व सैनिकों का कहना है कि नेपाली गोरखाओं की भारतीय सेना में भर्ती की परंपरा करीब 211 साल पुरानी है। नेपाल-अंग्रेज युद्ध और सुगौली संधि के बाद ब्रिटिश इंडिया सरकार ने गोरखा युवाओं की भर्ती शुरू की थी। भारत की आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही। हालांकि भारत में 14 जून 2022 से अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाली युवाओं की भर्ती रुक गई।

कर्नल खत्री के मुताबिक अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं को अग्निवीर के तौर पर भर्ती किया जाता है। चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत युवाओं को स्थायी सेवा में रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को निर्धारित राशि देकर सेवा से मुक्त किया जाता है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि भर्ती बंद होने से बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण रास्ता बंद हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि गोरखा सैनिकों से जुड़े आर्थिक लाभ और नेपाल में आने वाले रेमिटेंस पर भी इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने नेपाल सरकार से भारत के साथ जल्द बातचीत शुरू करने की मांग की है।

पूर्व सैनिकों का कहना है कि अग्निवीर योजना का पांच साल का परीक्षण चरण जून 2027 में पूरा होने वाला है। ऐसे में उनका आग्रह है कि नेपाल सरकार अभी से भारत के साथ संवाद शुरू करे, ताकि नेपाली युवाओं की भर्ती को लेकर आगे का रास्ता निकाला जा सके।

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