रुपये पर फिर बढ़ा दबाव, डॉलर के मुकाबले 95.42 पर पहुंचा; कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

मुंबई,  अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। रुपया छह पैसे की गिरावट के साथ 95.42 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.40 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें थोड़ी और कमजोरी आई और यह 95.42 रुपये प्रति डॉलर तक फिसल गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव के मुकाबले छह पैसे की गिरावट है।

मंगलवार को भी रुपये में कमजोरी दर्ज की गई थी। रुपया छह पैसे टूटकर 95.36 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में रुपये पर दबाव बने रहने से मुद्रा बाजार में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना रुपये के लिए नकारात्मक संकेत है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है, जिसका असर रुपये की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता को माना जा रहा है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौते तथा जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीद कमजोर पड़ने से भी बाजार में चिंता बढ़ी है।

इस बीच छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05 प्रतिशत बढ़कर 99.87 पर पहुंच गया। डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आने वाले समय में रुपये के लिए महत्वपूर्ण कारक रह सकती हैं।

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