नई दिल्ली। देशभर के उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जिन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना जरूरी है। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पात्र शिक्षकों के लिए TET योग्यता हासिल करने की अंतिम समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई है। पहले यह समयसीमा 31 अगस्त 2027 तक निर्धारित थी।
शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि आरटीई अधिनियम के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए TET को न्यूनतम अनिवार्य योग्यता माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने फैसले में TET को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता का हिस्सा माना था।
अदालत ने अपने फैसले में संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय के भीतर TET पास करने का निर्देश दिया था। इसके बाद समीक्षा याचिकाओं पर 29 मई 2026 को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को राहत दी और TET योग्यता हासिल करने की समयसीमा को एक साल बढ़ा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों से TET परीक्षा नियमित रूप से आयोजित करने का प्रयास करने को भी कहा है। अदालत की ओर से परीक्षा अधिमानतः साल में दो बार कराने की बात कही गई, ताकि पात्र शिक्षकों को योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकें।
अदालत ने उन सेवारत शिक्षकों की स्थिति पर भी विचार किया, जिनकी नियुक्ति आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा था। ऐसे शिक्षकों को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष राहत देते हुए TET पास किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई है।
हालांकि, इस राहत के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। ऐसे शिक्षक TET योग्यता हासिल किए बिना पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तों और तैनाती से जुड़े मामलों में संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहती है।