मुंबई भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच मजबूत प्रदर्शन किया। सेंसेक्स 78,499.17 और निफ्टी 24,570.65 के स्तर पर बंद हुए। अब नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों से तय होने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव पर रहेगी।
इस सप्ताह कई प्रमुख कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित करेंगी। इनमें टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, अपोलो हॉस्पिटल्स, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत फोर्ज और ग्रासिम इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। निवेशक कंपनियों के मुनाफे, बिक्री, मार्जिन और आने वाले समय के कारोबार को लेकर दिए गए अनुमान पर खास नजर रखेंगे। उम्मीद से बेहतर नतीजे बाजार में तेजी का माहौल बना सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन से संबंधित शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
घरेलू मोर्चे पर 12 अगस्त को जुलाई के खुदरा महंगाई यानी सीपीआई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसके अलावा थोक महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। महंगाई के आंकड़ों का असर भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दर संबंधी नीतियों पर पड़ सकता है। महंगाई में नरमी आने पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जिसका शेयर बाजार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर किसी भी नए घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत पर भी दबाव आ सकता है।
इस बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। शुक्रवार को एफआईआई ने 480.24 करोड़ और डीआईआई ने 235.56 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।