रिस्पना नदी को फिर से जीवंत बनाने की शुरुआत कैसे होगी?

देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। नदी के उद्गम स्थल से जीर्णोद्धार की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर अभियान का श्रीगणेश किया गया है। पहले चरण में बार्लोगंज से काठबंगला तक करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और इसी आधार पर पुनर्जीवन योजना तैयार की गई है।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में संबंधित विभागों को तय कार्ययोजना के अनुसार तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ और निर्मल नदियां केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी हैं।

उन्होंने निर्देश दिए कि पहले चरण में नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए छोटे-छोटे चेकडैमों का निर्माण, बड़े स्तर पर पौधरोपण, सौंदर्यीकरण और ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएं। इसका उद्देश्य नदी के उद्गम क्षेत्र को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बनाना है।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि मैदानी क्षेत्रों में रिस्पना नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और सीवर के दूषित जल का उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही नदी में पहुंचने वाले प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरे को रोकने के लिए नालों पर जालियां लगाकर कचरे के पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, अधीक्षण अभियंता संजय राय सहित वन विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम और नगर पालिकाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशासन का मानना है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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