हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने मेघालय हाई कोर्ट द्वारा दी गई नियमित जमानत रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने पुलिस और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें चार्जशीट और गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में तकनीकी व लिपिकीय त्रुटियों के आधार पर सोनम रघुवंशी को नियमित जमानत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हत्या जैसे गंभीर और जघन्य अपराध में केवल तकनीकी या टाइपिंग संबंधी गलतियों के आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के जमानत पर बाहर रहने से गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका बनी रह सकती है। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर मुकदमे का ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी को दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने का अधिकार रहेगा।

यह मामला इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। मई 2025 में शादी के बाद राजा और सोनम हनीमून मनाने मेघालय के चेरापूंजी (सोहरा) गए थे। यात्रा के दौरान राजा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए और 2 जून 2025 को उनकी क्षत-विक्षत लाश एक गहरी खाई से बरामद हुई थी।

जांच के दौरान मेघालय पुलिस ने दावा किया कि सोनम रघुवंशी ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। आरोप है कि वारदात को अंजाम देने के लिए भाड़े के हत्यारों की मदद ली गई। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक सोनम, उसके कथित प्रेमी सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सोनम को निर्धारित समय के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा और मामले की सुनवाई तेज गति से आगे बढ़ेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.