सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वह अपना आमरण अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब केंद्र सरकार यह लिखित और स्पष्ट आश्वासन दे कि हालिया छात्र आंदोलनों में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ है, इसलिए उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित एक पत्र साझा किया। पत्र में उन्होंने दोनों मंत्रियों का अस्पताल में आकर उनसे मुलाकात करने और अनशन समाप्त करने की अपील करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मंत्रियों ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वांगचुक की प्रमुख मांगों में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना, पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देना और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के लिए संसद में गंभीर चर्चा कराना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी और उनके इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, वांगचुक ने कहा कि इन आश्वासनों के बावजूद उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट वचन नहीं देती। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि आंदोलन में शामिल युवाओं का एकमात्र उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना था।
उन्होंने 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई। वांगचुक का कहना है कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और देश-दुनिया ने युवाओं के लोकतांत्रिक और संयमित विरोध को देखा। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने पत्र लिखकर या मुलाकात कर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों से समझौता किए बिना ही वह अपना फैसला लेंगे। उन्होंने दोहराया कि यदि सरकार उनकी इस अंतिम मांग पर स्पष्ट आश्वासन देती है तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।