डॉलर के मुकाबले फिर फिसला रुपया, जानिए क्यों बढ़ा दबाव

वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की ओर निवेशकों के बढ़ते रुझान के बीच मंगलवार को भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया छह पैसे की गिरावट के साथ 96.42 प्रति डॉलर पर कारोबार करता नजर आया। विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की मजबूत मांग का असर भारतीय मुद्रा पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

कारोबार की शुरुआत में रुपया 96.41 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला और शुरुआती सत्र में यह गिरकर 96.42 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को रुपया 96.36 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। इस तरह एक दिन में रुपये में छह पैसे की कमजोरी दर्ज की गई।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। डॉलर की मांग बढ़ने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है और भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा। एशिया की अधिकांश प्रमुख मुद्राओं में भी मंगलवार को कमजोरी देखने को मिली।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स भी मामूली बढ़त के साथ 100.97 पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स में मजबूती का असर आमतौर पर अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव के रूप में देखने को मिलता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रुपये की चाल काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू आर्थिक आंकड़े और विदेशी निवेश का प्रवाह भारतीय मुद्रा को कुछ राहत देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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