— मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के चलते फिलहाल चारधाम यात्रा स्थगित
— तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर पैदल मार्गों के साथ हेलीकॉप्टर सेवाएं भी बंद
— मलबे से सड़कें बंद होने के कारण कुमाऊं और गढ़वाल के सैकड़ों गांव अलग-थलग पड़े
— सुरक्षा के मद्देनजर पर्वतीय जिलों में रात के समय वाहनों की आवाजाही पर रोक
वंशिका बिष्ट
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और पहाड़ियों से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। संभावित हादसों को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चारधाम यात्रा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।
भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने के खतरे के कारण तीर्थयात्रियों की पैदल आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। वहीं, खराब मौसम के चलते चारधाम के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं भी पूरी तरह बंद हैं।
मार्ग अवरुद्ध होने से विभिन्न धामों और यात्रा पड़ावों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु फंसे हुए हैं। प्रशासन की टीमें उन्हें सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने में जुटी हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने पर्वतीय जिलों में रात के समय सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी है।
भारी बारिश का सबसे अधिक असर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के दूरस्थ इलाकों में देखने को मिला है। सड़कें बंद होने से सैकड़ों गांवों का संपर्क जिला और तहसील मुख्यालयों से कट गया है, जिससे लोगों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भूस्खलन और मलबा आने के कारण राज्यभर में 200 से अधिक राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग तथा 300 से अधिक ग्रामीण संपर्क मार्ग बंद हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें भारी मशीनों की मदद से मार्ग खोलने में जुटी हैं। हालांकि रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत और बचाव कार्यों में लगातार बाधा बन रही है।
अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी और गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिसके चलते निचले क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्रों के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें पूरी तरह मुस्तैद हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और लोगों से बिना जरूरी कारण यात्रा नहीं करने तथा प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
रात में वाहनों की आवाजाही पर रोक
पहाड़ियों से लगातार मलबा और पत्थर गिरने की घटनाओं को देखते हुए पर्वतीय जिलों में रात के समय सभी प्रकार के वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। यह निर्णय यात्रियों और चालकों की सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है।
500 से अधिक सड़कें बंद
भूस्खलन के कारण राज्य में 200 से अधिक राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग और 300 से अधिक ग्रामीण संपर्क मार्ग अवरुद्ध हैं। इन्हें खोलने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
अलर्ट पर प्रशासन, स्कूलों में अवकाश
भारी बारिश की चेतावनी के बाद संवेदनशील जिलों के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें पूरी तरह तैनात हैं।