देशभर में आगामी त्योहारों की तैयारी के बीच खाद्य तेल और तिलहन बाजार में तेजी का माहौल बन गया है। किसानों की ओर से कम कीमत पर फसल बेचने से इनकार और मंडियों में घटती आवक के कारण सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और बिनौला तेल के दाम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को पहले ही सोयाबीन जैसी फसलों के अच्छे दाम मिल चुके हैं। ऐसे में वे मौजूदा कीमतों पर बिक्री करने के इच्छुक नहीं हैं, जिससे मंडियों में आवक सामान्य से काफी कम बनी हुई है। दूसरी ओर, बिनौले की उपलब्धता लगभग समाप्त होने के कारण देश की करीब 97 प्रतिशत बिनौला पेराई मिलें बंद हो चुकी हैं। इसका सीधा असर खाद्य तेलों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
बरसात के मौसम में अचार उद्योग की मांग बढ़ने से सरसों तेल की खपत में भी तेजी आई है। वहीं, बिनौला तेल की कमी के चलते कई ब्रांडेड कंपनियां अब मूंगफली तेल की ओर रुख कर रही हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और सरकार द्वारा पाम तथा पामोलीन के आयात शुल्क मूल्य में बढ़ोतरी से आयातित खाद्य तेल महंगे हो गए हैं, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों को समर्थन मिला है।
बाजार आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह सरसों दाना, सरसों तेल, सोयाबीन दाना, सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल के भाव में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। महाराष्ट्र के लातूर स्थित सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांटों ने किसानों को आकर्षित करने के लिए भविष्य की खरीद कीमत 7,700 रुपये से बढ़ाकर 8,100 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि त्योहारी मांग इसी तरह बढ़ती रही और किसानों की ओर से आवक सीमित बनी रही, तो आने वाले समय में खाद्य तेलों और तिलहन की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं और कारोबारियों की नजर बाजार की मांग और आपूर्ति पर बनी हुई है।