विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान पुरी में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने व्यापक ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था लागू की है। भीड़ को व्यवस्थित रखने और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए शहर में अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के लिए विशेष रूट और पार्किंग स्थल तय किए गए हैं। साथ ही श्रीमंदिर और बड़दांड के आसपास के कई हिस्सों को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है।
पुलिस के अनुसार, ब्रह्मगिरि और भुवनेश्वर की ओर से आने वाले दोपहिया वाहन मंगला घाट चौक, मशानीचंडी चौक और देवीघाट चौक होते हुए जगन्नाथ बल्लभ पार्किंग तक पहुंचेंगे। यदि यहां पार्किंग पूरी तरह भर जाती है तो वाहनों को माटीतोटा खेल मैदान और उसके बाद माटीतोटा हेलीपैड मैदान में पार्क कराया जाएगा।
वहीं कोणार्क की दिशा से आने वाले दोपहिया वाहनों के लिए बैदास नगर चौक, ग्रिड स्टेशन चौक और सुभाष बोस चौक के रास्ते ब्लू फ्लैग बीच और नीलाचल अशोक क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। हल्के मोटर वाहनों के लिए भी अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। ब्रह्मगिरि से आने वाले वाहन समंग पार्किंग में खड़े होंगे, जबकि भुवनेश्वर और कोणार्क से आने वाले वाहनों के लिए तालबनिया स्थित भूदान पार्किंग, आईटीआई, विधानसभा अतिथि भवन, हेलीपैड, इंडोर स्टेडियम, उद्यान कृषि मैदान और स्वच्छ मछली बाजार परिसर को पार्किंग स्थल बनाया गया है।
रथ यात्रा के दौरान बसों के संचालन के लिए भी विशेष रूट तय किए गए हैं। भुवनेश्वर से आने वाली बसें सत्यबादी, चंदनपुर और मालतीपाटपुर मार्ग से तालबनिया बस स्टैंड तक जाएंगी। यदि बस स्टैंड भर जाता है तो यात्रियों को भूदान चौक के पास उतारकर बसों को स्वामीनारायण मंदिर के निकट पार्क किया जाएगा। कोणार्क और ब्रह्मगिरि से आने वाली बसों तथा पर्यटक बसों के लिए भी अलग-अलग मार्ग और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डॉक्टरखाना चौक से श्रीमंदिर तक पूरे बड़दांड मार्ग को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। इसके अलावा कई प्रमुख मार्गों पर सामान्य वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। पुरी पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक रूट और पार्किंग व्यवस्था का पालन करें, ताकि रथ यात्रा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।