पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहरा गया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बाद क्षेत्र में हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे थे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी पटरी पर लौट आई थी। लेकिन जहाजों पर हुए ताजा हमलों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। इन हमलों में एक कतर से जुड़े जहाज के प्रभावित होने की खबर के बाद सवाल उठने लगे हैं कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला कतर आखिर ईरान के निशाने पर क्यों है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह कतर में स्थित अल-उदैद एयरबेस है। यह पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है और अमेरिकी सेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इसी एयरबेस में अमेरिकी सेंट्रल कमांड का अग्रिम मुख्यालय और कंबाइंड एयर ऑपरेशन सेंटर मौजूद है, जहां से पूरे खाड़ी क्षेत्र में हवाई अभियानों की निगरानी और संचालन किया जाता है।
दोहा से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस एयरबेस पर हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यहां से लड़ाकू विमान, ड्रोन, निगरानी विमान और हवाई ईंधन भरने वाले विमानों का संचालन किया जाता है। इराक, सीरिया, जॉर्डन, मिस्र और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के समन्वय में भी यह अड्डा अहम भूमिका निभाता है।
अल-उदैद एयरबेस का निर्माण 1996 में शुरू हुआ था। वर्ष 2003 के इराक युद्ध, अफगानिस्तान अभियान, इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कार्रवाई और 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसे कई बड़े अभियानों में यह सैन्य अड्डा केंद्र में रहा है। यहां अत्याधुनिक रडार, पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और विशेष अभियान बल भी तैनात हैं।
हालांकि कतर ने पिछले कुछ वर्षों में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कायम रखने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाई है, लेकिन ईरान का मानना है कि उसके खिलाफ अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का संचालन इसी एयरबेस से होता है। यही कारण है कि ईरान की नाराजगी सीधे कतर से नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे और उसकी रणनीतिक मौजूदगी से जुड़ी मानी जा रही है।