उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष नवनीत सिंह गोसाई के असामयिक निधन पर प्रदेशभर में शोक की लहर है। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक एवं उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे राज्य आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि 54 वर्षीय नवनीत सिंह गोसाई राज्य आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के योद्धा थे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष समर्पित किए और आंदोलन को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके निधन से राज्य आंदोलनकारियों ने एक समर्पित और जुझारू साथी खो दिया है।
उन्होंने कहा कि नवनीत गोसाई हमेशा राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, अधिकारों और उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए सक्रिय रहे। हाल ही में उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय में आयोजित सत्याग्रह का नेतृत्व भी किया था और राज्य आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लगातार आवाज उठा रहे थे। धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि गोसाई आंदोलनकारियों के एक मजबूत और सर्वसम्मत संगठन के पक्षधर थे, ताकि उनकी आवाज और प्रभावी तरीके से सरकार तक पहुंच सके।
धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार से मांग की कि नवनीत सिंह गोसाई का अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ कराया जाए। उनका कहना है कि उत्तराखंड आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान उन्हें अवश्य मिलना चाहिए।
नवनीत सिंह गोसाई के निधन पर चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हरिकृष्ण भट्ट, कार्यकारी अध्यक्ष अनिल जोशी, डॉ. विजेंद्र पोखरियाल, बाल गोविंद डोभाल, सावित्री नेगी, जयप्रकाश उत्तराखंड, कमल पांडे, महेश जोशी, नवीन जोशी, मनीष सिंह, विशंभर बौठियाल और ललित भद्री सहित अनेक आंदोलनकारियों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। सभी नेताओं ने इसे राज्य आंदोलन के लिए बड़ी क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।