स्किन कैंसर की समय रहते पहचान अब पहले से कहीं अधिक आसान हो सकती है। कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में त्वचा के सबसे खतरनाक कैंसर मेलेनोमा का शुरुआती चरण में ही पता लगाने में मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट टेंपरेरी टैटू तैयार किया है, जो त्वचा पर कैंसर के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने से पहले ही शरीर में होने वाले सूक्ष्म तापमान परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह टैटू सामान्य स्थायी टैटू की तरह नहीं है, बल्कि एक अस्थायी स्मार्ट डिवाइस है। मेलेनोमा कैंसर की कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक ऊर्जा का उपयोग करती हैं, जिससे प्रभावित हिस्से का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। यही मामूली तापमान परिवर्तन इस नई तकनीक की पहचान का आधार बनता है।
इस स्मार्ट टैटू को विकसित करने के लिए माइक्रोनीडल्स और विशेष नैनो पार्टिकल्स का उपयोग किया गया है। माइक्रोनीडल्स की मदद से नैनो पार्टिकल्स त्वचा की ऊपरी परत के नीचे पहुंचाए जाते हैं, जहां वे बेहद सूक्ष्म तापमान बदलावों को भी महसूस कर सकते हैं। इससे उन क्षेत्रों की पहचान संभव हो सकती है, जहां कैंसर कोशिकाएं विकसित होना शुरू हो गई हों।
जांच के दौरान टैटू को इन्फ्रारेड लाइट के संपर्क में लाया जाता है। यदि त्वचा के किसी हिस्से का तापमान सामान्य से अधिक होता है, तो टैटू में मौजूद नैनो पार्टिकल्स अलग प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं और उनकी चमक बदल जाती है। इसके बाद अल्ट्राफास्ट इमेजिंग तकनीक से उस क्षेत्र का तापमान मानचित्र तैयार किया जाता है, जिससे डॉक्टर संभावित कैंसर प्रभावित हिस्से की पहचान कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी क्लीनिकल परीक्षण सफल रहे, तो यह तकनीक स्किन कैंसर की शुरुआती जांच का कम दर्द वाला और प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। इससे बीमारी का जल्द पता लगाकर समय पर उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ेगी। हालांकि फिलहाल यह तकनीक शोध के चरण में है और व्यापक चिकित्सा उपयोग से पहले इसे कई वैज्ञानिक परीक्षणों और नियामकीय मंजूरियों से गुजरना होगा।