अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और मीडिया के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। विवाद राष्ट्रपति के नए एयर फोर्स वन विमान की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को लेकर पैदा हुआ है। इन रिपोर्टों के बाद संघीय जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर कई पत्रकारों को समन जारी किए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी मीडिया तक कैसे पहुंची।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि कतर की ओर से उपहार में मिले बोइंग विमान, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान के रूप में शामिल किया गया है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एजेंसियों ने चिंता जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप को कुछ समय तक इस विमान का उपयोग न करने की सलाह दी थी।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया कि नए एयर फोर्स वन में पुराने राष्ट्रपति विमान की तरह सभी उन्नत सुरक्षा और एंटी-मिसाइल सिस्टम पूरी तरह स्थापित नहीं किए गए हैं। दावा किया गया कि जब तक सभी सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय नहीं हो जातीं, तब तक यह विमान संभावित मिसाइल हमलों जैसी परिस्थितियों में अपेक्षित सुरक्षा देने में सक्षम नहीं होगा।
इस बीच ट्रंप की हालिया विदेश यात्रा ने भी चर्चाओं को और तेज कर दिया। नाटो सम्मेलन में वह नए विमान से तुर्की पहुंचे, लेकिन आगे की यात्रा के लिए पुराने राष्ट्रपति विमान का उपयोग किया। हालांकि अमेरिका लौटते समय उन्होंने फिर नए विमान से यात्रा की, जिससे सुरक्षा तैयारियों को लेकर कई तरह के सवाल उठे।
वहीं, व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि नया एयर फोर्स वन पूरी तरह सुरक्षित है और यात्रा के दौरान विमान बदलना केवल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा था। व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर ऐसी रणनीतिक व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं। दूसरी ओर, प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने पत्रकारों को समन भेजे जाने पर चिंता जताते हुए इसे मीडिया के स्रोतों की गोपनीयता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।