कैंपा की बड़ी पहल, डॉल्फिन से हिम तेंदुए तक 4 नई संरक्षण परियोजनाओं को मिली मंजूरी

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में कोयंबटूर स्थित सीएएसएफओएस में राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) के शासी निकाय की सातवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन संरक्षण, वनीकरण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। साथ ही वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी नई योजनाओं पर भी सहमति बनी।

बैठक में डॉल्फिन, हिम तेंदुआ, भारतीय गैंडा और जंगली जल भैंस के संरक्षण के लिए चार नई राष्ट्रीय परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा मणिपुर के राज्य पशु और दुर्लभ प्रजाति सांगाई हिरण के संरक्षण कार्यक्रम को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य इन विलुप्तप्राय प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और उनकी संख्या में वृद्धि करना है।

शासी निकाय ने वर्ष 2026-27 से डिजिटल वार्षिक परिचालन योजना लागू करने का स्वागत किया। इसके तहत सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपनी परियोजनाओं और योजनाओं को पूरी तरह ऑनलाइन तैयार कर प्रस्तुत करेंगे। साथ ही कैंपा की परियोजनाओं की निगरानी के लिए जीआईएस आधारित आधुनिक मॉनिटरिंग प्रणाली की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

बैठक में मैंग्रोव संरक्षण के लिए संचालित ‘मिष्टी योजना’ का विस्तार वर्ष 2029 तक करने और इसके लिए 600 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी गई। वहीं नगर वन योजना के तहत देशभर में अब तक 652 नगर वन और वाटिकाएं विकसित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

इसके अलावा शासी निकाय ने ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को भी स्वीकृति प्रदान की। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से देशभर के करीब 15,000 पवित्र (आस्था) वनों का संरक्षण और पुनर्स्थापन किया जाएगा। भूमि क्षरण रोकने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता को संरक्षित करने के उद्देश्य से एक नई राष्ट्रीय योजना को भी मंजूरी दी गई। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और शासी निकाय के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

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