स्वस्थ शरीर और मजबूत मांसपेशियों के लिए प्रोटीन सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक माना जाता है। शाकाहारी भोजन में पनीर, सोयाबीन, दालें और मेवे अच्छे प्रोटीन स्रोत हैं, लेकिन जब उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की बात आती है तो अधिकतर लोग चिकन, मटन और मछली को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन तीनों में से सबसे बेहतर विकल्प कौन-सा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार चिकन लीन प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। खासकर चिकन ब्रेस्ट में प्रति 100 ग्राम लगभग 25 से 30 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जबकि इसमें फैट और कैलोरी अपेक्षाकृत कम होती है। यही वजह है कि वजन कम करने वाले, फिटनेस प्रेमी और बॉडीबिल्डर इसे अपनी डाइट में शामिल करना पसंद करते हैं। कम सैचुरेटेड फैट होने के कारण यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।
वहीं मछली भी उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत है। 100 ग्राम पकी हुई मछली में लगभग 22 से 26 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड है, जो हृदय, मस्तिष्क, त्वचा और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा मछली का प्रोटीन शरीर आसानी से अवशोषित कर लेता है, जिससे यह संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
दूसरी ओर मटन भी प्रोटीन से भरपूर होता है, लेकिन इसमें फैट और कैलोरी की मात्रा चिकन और मछली की तुलना में अधिक होती है। अधिक मात्रा में मटन खाने से वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ने के साथ हृदय रोग और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ मटन का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लक्ष्य मांसपेशियों का विकास और कम फैट वाला प्रोटीन प्राप्त करना है तो चिकन बेहतर विकल्प है। वहीं, यदि प्रोटीन के साथ हृदय और मस्तिष्क को भी अतिरिक्त पोषण देना चाहते हैं तो मछली अधिक लाभदायक मानी जाती है। एक सामान्य वयस्क को प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है, हालांकि यह उम्र, लिंग और शारीरिक गतिविधि के अनुसार बदल सकती है।