वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में रुपया दो पैसे की गिरावट के साथ 95.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले शुरुआती कारोबार में रुपया चार पैसे टूटकर 95.52 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह रही कि निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और रुपये पर दबाव बना रहा।
हालांकि घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक कारोबार ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की। मजबूत इक्विटी बाजार और कुछ विदेशी निवेश प्रवाह के कारण रुपये में बड़ी गिरावट नहीं आई।
बुधवार को रुपया 52 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.48 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इसके मुकाबले गुरुवार को शुरुआती कमजोरी के बाद मुद्रा में मामूली सुधार देखने को मिला और अंततः यह 95.50 प्रति डॉलर पर बंद हुई।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 100.98 पर दर्ज किया गया। डॉलर इंडेक्स में नरमी के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बनाए रखा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रुपये की चाल काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार होता है और विदेशी निवेश बढ़ता है तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।