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धामी सरकार के 5 साल पर कांग्रेस का हमला, गरिमा दसौनी ने उठाए कई बड़े सवाल

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के पांच वर्ष पूरे होने के दावों पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का कार्यकाल विकास और सुशासन के बजाय विवादों, जनहित के मुद्दों की अनदेखी और समाज को बांटने वाली राजनीति के लिए याद किया जाएगा।

गरिमा दसौनी ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, बिगड़ती कानून व्यवस्था, नशे का बढ़ता कारोबार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उनका आरोप है कि सरकार इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में असफल रही। उन्होंने कहा कि रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पलायन और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से कोई उल्लेखनीय उपलब्धि सामने नहीं आई है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता से जुड़े मूल मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय धार्मिक और सांप्रदायिक विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे सवालों पर सरकार जवाब देने से बचती रही है।

गरिमा दसौनी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और भ्रष्टाचार के मामलों को भी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। इसके अलावा उन्होंने केदारनाथ धाम से जुड़े कथित सोना प्रकरण, जॉर्ज एवरेस्ट भूमि विवाद और बद्रीनाथ धाम में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर भी सरकार को घेरा।

उन्होंने पंचायत चुनाव के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, हिंसा और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लगाते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हुए हैं।

गरिमा दसौनी ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आए वास्तविक बदलाव के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही दावा किया कि प्रदेश की जनता अब सरकार से विकास और जवाबदेही का स्पष्ट हिसाब मांग रही है।

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