चारधाम हेली सेवा को लेकर बड़ा फैसला, उत्तराखंड में बनेंगे नए हेलीपोर्ट और एयरस्ट्रिप

 देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम हेली सेवाओं को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वर्ष 2026 की चारधाम हेली सेवाओं के प्रथम चरण की समीक्षा के साथ राज्य में विमानन अवसंरचना के विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष विपिन कुमार, संयुक्त सचिव असांगबा चुबा, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, प्रमुख सचिव सुधांशु सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 में 19 अप्रैल से 26 जून तक चारधाम हेली सेवाओं का पहला चरण सुरक्षित और सफलतापूर्वक संचालित किया गया। अब दूसरे चरण का संचालन 15 सितंबर 2026 से प्रस्तावित है। इस बीच के समय का उपयोग सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने, आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास और परिचालन तैयारियों को समय पर पूरा करने में किया जाएगा।

समीक्षा के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा, मौसम संबंधी सूचना प्रणाली और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए, जिनमें अतिरिक्त वेदर ऑब्जर्वेशन स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी और उड़ानों की सुरक्षा बढ़ेगी।

बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिए भविष्य की विमानन विकास योजना भी प्रस्तुत की। इसके तहत अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और श्रीनगर में नए हेलीपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा सके।

इसके अलावा संशोधित उड़ान (UDAN) योजना के तहत लैंसडाउन, रामनगर और नैनीताल में हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आवश्यक अवसंरचना विकसित करने और राज्य में तीन नए एयरस्ट्रिपों की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने पर भी सहमति बनी। अधिकारियों ने कहा कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन से उत्तराखंड में पर्यटन, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई गति मिलेगी।

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