दो फ्लॉप फिल्मों के बाद नहीं मानी हार, आज बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में शुमार

मुंबई। बॉलीवुड के चर्चित फिल्म निर्देशक आनंद एल राय आज हिंदी सिनेमा के सबसे सफल फिल्मकारों में गिने जाते हैं, लेकिन उनकी सफलता के पीछे संघर्ष, धैर्य और लगातार सीखने की लंबी कहानी छिपी है। शुरुआती दौर में लगातार दो फिल्में फ्लॉप होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कहानी कहने की शैली में बदलाव कर खुद को इंडस्ट्री के सफल निर्देशकों की कतार में खड़ा कर दिया।

28 जून 1971 को नई दिल्ली में जन्मे आनंद एल राय का सपना शुरू से फिल्म निर्देशक बनने का नहीं था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन कॉर्पोरेट जीवन उन्हें रास नहीं आया। इसके बाद उन्होंने अपने बड़े भाई के मार्गदर्शन में टेलीविजन इंडस्ट्री में कदम रखा और निर्देशन की बारीकियां सीखीं। यही अनुभव आगे चलकर उनके फिल्मी करियर की मजबूत नींव साबित हुआ।

आनंद एल राय ने वर्ष 2007 में फिल्म ‘स्ट्रेंजर्स’ से निर्देशन की शुरुआत की। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद 2008 में रिलीज हुई ‘थोड़ा लाइफ थोड़ा मैजिक’ भी दर्शकों का दिल जीतने में असफल रही। लगातार दो असफलताओं ने उनके करियर पर सवाल खड़े कर दिए, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम किया और दर्शकों की पसंद को समझने का प्रयास किया।

करीब तीन साल की मेहनत के बाद 2011 में रिलीज हुई ‘तनु वेड्स मनु’ ने उनकी किस्मत बदल दी। छोटे शहर की पृष्ठभूमि, दमदार किरदार और दिल को छू लेने वाली कहानी ने फिल्म को बड़ी सफलता दिलाई। इसके बाद ‘रांझणा’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के शीर्ष निर्देशकों में शामिल कर दिया।

आनंद एल राय ने बाद में अपना प्रोडक्शन हाउस ‘कलर येलो प्रोडक्शंस’ भी शुरू किया, जिसके बैनर तले ‘निल बटे सन्नाटा’, ‘शुभ मंगल सावधान’ और ‘हसीन दिलरुबा’ जैसी चर्चित फिल्मों का निर्माण हुआ। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार प्रयास और खुद में सुधार की इच्छा किसी भी असफलता को सफलता में बदल सकती है।

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